तीन मौके जब चोट लगने के बावजूद भी खिलाड़ी डटे रहे मैदान में

खेल की दुनिया में चोट लगना एक आम बात हैं, क्योंकि खिलाड़ी मैच के दौरान अपने शरीर पर बहुत अधिक दबाव डालते हैं, जिससे कई बार खिलाड़ी की मांस-पेशिया खीच जाती है और कभी-कभी तो हड्डी तक टूट जाती हैं.

खिलाड़ियों को मैच के दौरान कभी बहुत अधिक चोट लग जाती है, जिसके चलते वह मैदान तक छोड़ देते हैं. हालांकि कुछ खिलाड़ी खेल में चोट लगने के बावजूद भी मैदान नहीं छोड़ते हैं और अपना खेल जारी रखते हैं.

आज हम आपकों अपने इस ख़ास लेख में ऐसे तीन मौकों के बारे में बताएंगे, जब चोट लगने के बावजूद भी खिलाड़ी मैदान में ही डटे रहे थे.

जेम्स एंडरसन  (भारत)

जेम्स एंडरसन इंग्लैंड के तेज गेंदबाज हैं. हालांकि यह अपना पूरा ध्यान टेस्ट क्रिकेट में ही केन्द्रित करते हैं. हाल ही में इन्होने अपने टेस्ट क्रिकेट करियर में 600 विकेट पूरे किये थे. इनका अपने खेल के प्रति बहुत दृढ़ निश्चय देखने को मिलता हैं.

इंग्लैंड के तेज गेंदबाज जेम्स एंडरसन को भारत के खिलाफ साल 2021 के ओवल टेस्ट में फील्डिंग करते समय चोट लग गई. उनके दाएं पैर के घुटने में कट लग गया था इसमें से खून रिसने लगा, जो उनके कपड़ों के भर से साफ़ दिखाई दे रहा था. उन्होंने फिर भी मैदान नहीं छोड़ा और पुजारा का अहम विकेट भी चटकाया था.

वहाब रियाज vs (श्रीलंका)

पाकिस्तान के तेज गेंदबाज वहाब रियाज बेहद शानदार खिलाड़ी हैं, यह पाकिस्तान के लिए पिछले कई सालों से बहुत अच्छा प्रदर्शन करते आ रहे हैं. यह भी खेल के प्रति निष्ठापूर्ण खिलाड़ी हैं.

श्रीलंका बनाम पाकिस्तान का दूसरा टेस्ट मैच खेला जा रहा था, इस दौरान फील्डिंग करते हुए वहाब रियाज के हाथो में चोट लग गयी थी, उसके बावजूद भी उन्होंने मैदान नहीं छोड़ा था और गेंदबाजी करने आये थे. उसके बाद जब उन्होंने डॉक्टर को दिखाया तो उनके हाथ ने गंभीर चोट थी. उसके बाद उन्हें पूरी सीरीज से ही बहार होना पड़ा था.

सचिन तेंदुलकर vs (1989)

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क्रिकेट जगत के भगवान कहे जाने वाले सचिन तेंदुलकर भारत के दिग्गजों में से एक माने जाते हैं. उनके नाम बहुत से रिकॉर्ड भी दर्ज हैं. सचिन तेंदुलकर भी क्रिकेट के प्रति बहुत दृढ़ संक्ल्पीय थे.  

1989 में इंडिया और पाकिस्तान के बीच टेस्ट मैच खेला जा रहा था. इस मैच के दौरान इंडिया की स्थिति अच्छी नहीं थी, इंडिया का हारना लगभग तय था. वकार युनिस के सामने सचिन तेंदुलकर बल्लेबाजी करने उतरे थे, जो उस समय केवल 16 साल के थे. अपनी दूसरी गेंद खेल रहे थे वाकर युनिस ने उन्हें बाउंसर डाला था जो जाकर उनकी नाक में लगा था और वह लहू-लुहान हो गये थे. वह जमींन पर गिर गये थे.

उनकी नाक से खून बह रहा था. इतनी गम्भीर चोट लगने के बावजूद भी वह मैदान छोड़ के नहीं गये थे. यह उनका देश के लिए प्रेम ही था की उन्होंने कहा मैं खेलेगा’. और उसके बाद उन्होंने वकार यूनस को उसी ओवर में दो चौके जड़ दिए थे.

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